गन्धर्व-मंत्र
ॐ क्लीं विश्वावसु-गन्धर्व-राजाय नमः ॐ ऐं क्लीं सौः हंसः सोहं ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं सौः ब्लूं ग्लौं क्लीं विश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय कन्या-दान-रतोद्यमाय धृत-कह्लार-मालाय भक्तानां भग-भाग्यादि-वर-प्रदानाय सालंकारां सु-रुपां दिव्य-कन्या-रत्नं मे देहि-देहि, मद्-विवाहाभीष्टं कुरु-कुरु, सर्व-स्त्री वशमानय, मे लिंगोत्कृष्ट-बलं प्रदापय, मत्स्तोकं विवर्धय-विवर्धय, भग-लिंग-रोगान् अपहर, मे भग-भाग्यादि-महदैश्वर्यं देहि-देहि, प्रसन्नो मे वरदो भव, ऐं क्लीं सौः हंसः सोहं ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं सौं ब्लूं ग्लौं क्लीं नमः स्वा
यह मंत्र सुन्दर स्त्री सुख प्रदान करता है
यह मंत्र सिद्ध हो गया था।लेकिन मैंने पढ़ना छोड़ दिया तो सिद्धि चली गयी इसे पुनः सिद्ध कैसे करे? बहुत समय से लगातार पढ़ने पर भी अब पुनः सिद्ध नहीं हो रहा है।
जवाब देंहटाएंकृपया जवाब तो दे।
जवाब देंहटाएंNitya kitna time jaap karna ha
जवाब देंहटाएंभाई कौन से ग्रंथ से लिया गया है।
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